रायपुर

पाठयपुस्तक निगम के पूर्व GM अशोक चतुर्वेदी को बड़ी राहत : छत्तीसगढ़ HC ने मंजूर की जमानत अर्जी, आय से अधिक संपत्ति समेत टेंडर में गड़बड़ी का है आरोप

बिलासपुर। पाठ्यपुस्तक निगम के पूर्व जीएम अशोक चतुर्वेदी को छहत्तीसगढ़ हाई कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। आय से अधिक संपत्ति समेत टेंडर मामले में गड़बड़ी के आरोप में जेल में बंद अशोक चतुर्वेदी की जमानत अर्जी अदालत से स्वीकार कर ली है। एसीबी ईओडब्ल्यू की टीम ने उन्हें गिरफ्तार किया था। पूरे मामले की सुनवाई जस्टिस दीपक कुमार तिवारी के सिंगल बेंच द्वारा की गई।

बता दें कि, साल 2016 में अशोक चतुर्वेदी और उसके साथियों द्वारा टेंडर घोटला करने का आरोप है। इस घोटाले में पूर्व जीएम चतुर्वेदी के अलावा तत्कालीन सीनियर मैनेजर फाइनेंस के साथ जे शंकर, सच्चिदानंद शास्त्री, संजय पिल्ले के खिलाफ भी केस दर्ज हैं। सभी अधिकारी उस समय टेंडर समिति के सदस्य थे। इनकी सहमति से ही टेंडर जारी किया गया था। इसके अलावा टेंडर लेने वाले हितेश चौबे को भी आरोपी बनाया गया है।

आय से अधिक संपत्ति और टेंडर गड़बड़ी का आरोप

पूर्व जीएम अशोक चतुर्वेदी ने पद का दुरुपयोग करते हुए पाठ्य पुस्तक निगम के ठेकेदारों के पैसे अपने बेटे के खाते में ट्रांसफर करवाए है। पूर्व जीएम पर ईओडब्लू-एसीबी में तीन अलग-अलग केस दर्ज हैं। इसमें आय से अधिक संपत्ति के अलावा टेंडर में फर्जी कंपनियों को शामिल कर टेंडर दिलाने का आरोप है। इसके अलावा पद के दुरुपयोग का एक केस पंजीबद्ध है।

जानकारी के मुताबिक़, नवंबर 2019 में राज्य शासन ने पाठ्यपुस्तक निगम से चतुर्वेदी की प्रतिनियुक्ति खत्म करते हुए उनकी सेवाएं पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग को लौटा दी थी। इस निर्णय के खिलाफ उन्होंने हाईकोर्ट से स्टे ले लिया था। टेंडर में हुई अनियमितता की शिकायत के बीच जांच का जिम्मा एसीबी-ईओडब्ल्यू को सौंपा गया था।

जानकारी के अनुसार होप इंटरप्राइजेज को अकेले को काम देने के लिए और लाभ पहुंचाने के लिए अशोक चतुर्वेदी और कमेटी के सभी सदस्यों ने कपटपूर्वक, जालसाजी से तैयार और झूठी निविदाओं पर फैसला लिया और होप इंटरप्राइजेज को करोड़ों रुपये का ठेका दिया गया। उन्होंने बताया कि इस टेंडर में चार आवेदक बताए गए हैं, लेकिन जांच में साबित हुआ कि होप इंटरप्राइजेज को काम देने के लिए बाकी फर्मों के नाम से झूठी निविदाएं पेश की गईं। जिनमें कागजात भी जालसाजी से बनाए गए।

नकली बिजली बिल बनाए गए। बिजली बिल छाप लिए गए, निविदाकारों की ओर से दस्तखत भी नहीं किए गए। और इन फर्मों की तरफ से जो ईएमडी और बैंक ड्रॉफ्ट लगाए गए वे भी होप इंटरप्राइजेज के कर्मचारी बृजेन्द्र तिवारी के द्वारा पेश किए गए।

किन आधारों पर मिली जमानत याचिका

अशोक चतुर्वेदी के वकील हिमांशु सिन्हा ने बताया कि, अशोक चतुर्वेदी के पिता ने अशोक के नाम पर 1994 में जो संपत्ति खरीदी थी उसे भी एजेंसी ने अवैध तरीके से अर्जित संपत्ति बता दिया। और ये बैक डेट जाकर किया गया। क्योंकि, एजेंसी जिस चेक पीरियड की जाँच कर रही थी वह साल 2000 से 2019 तक था। इसके अलावा उन्होंने ने कहा कि जांच एजेंसी के पास विदेश भ्रमण को लेकर कोई ठोस आधार नहीं था। एजेंसी ने अपनी जांच में दावा किया था कि अशोक ने अवैध तरीके से अर्जित पैसों से कई बार विदेश का दौरा किया। हालांकि, उनके पासपोर्ट में ऐसे किसी भी दौरे के रिकॉर्ड दर्ज नहीं थे।

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