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टुटेजा, ढेबर समेत 6 लोगों की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट की बड़ी टिप्पणी, कहा- छत्तीसगढ़ के शराब घोटाला मामले में ‘नहीं’ बनता ED का केस

दिल्ली। छत्तीसगढ़ का मशहूर शराब घोटाला मामले में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने बड़ी टिप्पणी की है। कोर्ट ने ईडी से कहा कि उसकी जांच के लिए जो पहले से दर्ज केस होना चाहिए, वह इस मामले में नहीं है, इसलिए इस मामले में किसी रकम को जुर्म से पाया हुआ नहीं कहा जा सकता है। इसलिए इस मामले में मनी लॉड्ररिंग नहीं माना जा सकता है।

जस्टिस अभय एस ओका और जस्टिस उज्जवल भुयन की बेंच ने 6 लोगों की दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए आज यह बात कही। अदालत ने आज की सुनवाई में ईडी के वकील से पूछा कि अगर यह मामला किसी प्रेडिकेट ऑफेंस पर नहीं टिका है, तो फिर इसमें कोई रकम जुर्म की कमाई नहीं है। ईडी की तरफ से अदालत ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस वी राजू मौजूद थे। जिन लोगों ने यह याचिका दायर की थी उनमें करिश्मा ढेबर, अनवर ढेबर, अरुणपति त्रिपाठी, सिद्वार्थ सिंघानिया समेत राज्य के रिटायर्ड आईएएस अनिल टुटेजा, और उनके बेटे यश टुटेजा भी हैं।

बता दें कि, इसके पहले याचिकाकर्ताओं के तर्कों पर अदालत ने गौर किया था, जिसमें कहा गया था कि ईडी का मामला एक आयकर अधिनियम के उल्लंघन पर टिका हुआ है, जो कि पीएमएलए के तहत जुर्म नहीं है। और इस पर अदालत ने इन याचिकाकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई रोक दी थी।

आज जस्टिस ओका ने कहा कि ईडी द्वारा दर्ज शिकायत नहीं टिक सकती, क्योंकि कोई प्रेडिकेट ऑफेंस नहीं हुआ है। इस पर अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ने अदालत को कहा कि अलग से एक मामला दर्ज किया जा रहा है, जिस पर ईडी अलग से एक केस दर्ज करेगी।

इस पर अदालत ने पूछा क्या ऐसा केस दर्ज कर लिया गया है। तो ईडी के वकील ने कहा अदालती स्थगन के कारण यह नहीं हो पाया है। इस पर अदालत ने अलगी पेशी पर 8 अप्रैल को सारी जानकारी रखने को कहा है।

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