रायपुर

रायपुर के मास्टर प्लान में कई खामी : भूपेश सरकार ने बिल्डरों को फायदा पहुंचाने बनाया प्लान, मंत्री ओपी चौधरी ने दिए जांच के आदेश

रायपुर। पूर्ववर्ती भूपेश सरकार में पास किए गए मास्टर प्लान में कई खामियां उजागर होने लगी हैं। कई लोगों ने आरोप लगाया है कि राजधानी के बड़े बिल्डरों के इशारे पर मास्टर प्लान तैयार किया गया है। लगातार शिकायतों के बाद आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओपी चौधरी ने पूरे प्लान की जांच करने के आदेश दे दिए हैं। इसके लिए टाउन एंड प्लानिंग विभाग के अफसरों की एक टीम बनाई जा रही है, जो जल्द जांच रिपोर्ट पेश करेगी। इसके बाद मास्टर प्लान बदलेगा।

बता दें कि इस मास्टर प्लान में कई जगहों में आवासीय क्षेत्र को कृषि भूमि और मनोरंजन भूमि बता दिया गया। वहीं कई क्षेत्रों में कालोनियों के बीच से भी सड़क का प्रावधान कर दिया गया है। प्लान में जिन जगहों पर तालाब दिखाया गया है, वहीं वर्तमान में कालोनियां या फिर घर बनाए जा चुके हैं। इतना ही नहीं, कई क्षेत्रों में बढ़ती जनसंख्या के दृष्टिकोण से मार्गों की चौड़ाई बढ़ाने के बचाय घटा दी गई है। इसे देखते हुए आरोप लगाया गया है कि अपने चहेतों को लाभ पहुंचाने के लिए पूर्व मंत्री डॉ शिव डहरिया ने इस तरह का काम किया है।

नगर एवं ग्राम निवेश के विभागीय मंत्री ओपी चौधरी से इसकी शिकायत की गई है, जिस पर मंत्री ने मामले की जांच के निर्देश दिए हैं और कमेटी गठित करने की भी बात कही है। ऐसे में जांच के बाद मास्टर प्लान में संशोधन भी किया जा सकता है।

ये गड़बड़ी आई सामने

मास्टर प्लान 2031 में राजीनाम का कोई प्रावधान नहीं है। नगर निगम रायपुर के प्रस्ताव के अनुसार अतिरिक्त 33 प्रतिशत निर्मित क्षेत्र को जुर्माना अदा कर कभी भी नियमित किया जा सकता है।

मास्टर प्लान 2031 में अटारी, भटगांव, बोरियाकला, चंदनीडीह, चरौदा, दोंदेकला, गिरौद, काठाडीह, मांढर, मोहदी, निमोरा, सिलतरा, उरला समेत कई घनी आबादी वाली जगहों को शामिल ही नहीं किया गया है। इन जगहों की कमर्शियल, आवासीय या मिश्रित जमीन को किसी भी योजना में शामिल नहीं किया गया है। इन सभी जगहों पर रायपुर के कई बड़े बिल्डरों के प्रोजेक्ट लांच हुए हैं या होने वाले हैं।

अंतरराज्यीय बस्तर मिनस के लिए एमआर रोड केवल 24 मीटर तक कर दिया गया है, लेकिन मास्टर प्लान 2031 में चारों ओर भूमि उपयोग को कृषि से वाणिज्यिक में बदल दिया गया है।

2011 के मास्टर प्लान में सरोना की जमीन को आमोद-प्रमोद की जमीन बताई गई थी। बाद में इसी जमीन को आवासीय उपयोग के लिए उसका डायवर्सन करा दिया गया।

पुलिस ग्राउंड परिसर को पीएसपी के स्थान पर हरा मनोरंजन दर्शाया गया है। मोतीबाग, प्रेस क्लब, नगर निगम बिल्डिंग को ओडी पीएसपी की जगह ग्रिन दिखाया गया है।

डब्ल्यूआरएस कालोनी भनपुरी कापा दलदल सिवनी में एक हजार हेक्टेयर भूमि का उपयोग परिवहन के रूप में दर्शाया गया है, लेकिन यह रेलवे की रिक्त भूमि है।

स्वीकृत आवासीय लेआउट, आवासीय प्लाटिंग के लिए लागू ले आउट अनुमोदन खुद किया है और उन्हीं भूमि को ले आउट में कृषि भूमि के रूप में दिखाया गया।

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