रायपुर

टाइफाइड के मरीजों की आंबेडकर अस्पताल में परेशानी बढ़ी

रायपुर/ छत्‍तीसगढ़ के सबसे बड़े आंबेडकर अस्पताल में मरीजों की परेशानी कम नहीं हो रही है। रिएजेंट किट की कमी की वजह से मरीज और स्वजन जांच के लिए भटक रहे हैं। वे महंगी दरों पर निजी लैब में जांच करवाने को मजबूर हैं। ठंड में ओपीडी और आइपीडी मरीजों की संख्या में वृद्धि हो रही है। इसके बावजूद अस्पताल प्रशासन अनदेखी कर रहा है।

लीवर, किडनी, सर्दी, जुकाम और बुखार की जांच के लिए किए जाने वाले एलएफटी और आरएफटी जांच नही हो पा रही है। पीसीटी, एसीटीएच, आइजीएफ, एंटीएचइवी एंटीबाडी, एएमएच, एंटीएचबीएस, आइजीएम आदि जांच भी 15 दिनों से अधिक समय से बंद हैं। इमरजेंसी में आने वाले मरीजों को ज्यादा दिक्कत हो रही है। इन जांचों के लिए मरीजों को निजी लैब जाना पड़ रहा है, जहां उनसे मनचाहे दाम वसूले जा रहे हैं।

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में टाइफाइड और हेपेटाइटिस की जांच हो रही है, जबकि आंबेडकर अस्पताल में यह बंद है। प्रदेशभर से आंबेडकर अस्पताल में रोजाना डेढ़ हजार से ज्यादा मरीज इलाज कराने के लिए आते हैं। इसमें से आधे से ज्यादा लोगों का इलाज शुरू करने के लिए जांच की आवश्यकता होती है। बताया जाता है कि स्वास्थ्य मंत्री श्यामबिहारी जायसवाल से मुलाकात कर डाक्टरों ने किट की कमी से अवगत कराया है।

जिला अस्पताल जाने की सलाह आंबेडकर अस्पताल में जांच प्रभावित होने पर मरीज और स्वजन को जिला अस्पताल जाने की सलाह दे दी जाती है। डाक्टरों का कहना है कि आंबेडकर अस्पताल में इलाज कराने मरीज काफी उम्मीद से आते हैं। निजी लैब में उन्हें ज्यादा राशि करनी पड़ती है, जबकि जिला अस्पताल के हमर लैब में सस्ते दाम पर जांच सुविधा उपलब्ध है। मरीज को सबसे ज्यादा खर्च दवा और जांच पर ही होता है।

अक्सर होती है परेशानी आंबेडकर अस्पताल में करीब आठ पहले भी इसी तरह की समस्या सामने आई थी। उस दौरान भी मरीज और स्वजन जांच के लिए इधर-उधर मजबूर थे। इस मामले का राजफाश होने के बाद किट की सप्लाई की गई थी और काफी प्रयास के बाद मरीजों को राहत मिली थी। किट अनुपलब्धता की लगातार शिकायत मिलने के बाद भी अस्पताल में पर्याप्त मात्रा में उपलब्धता का सिस्टम अभी तक नहीं बनाया जा सका है।

आंबेडकर अस्पताल के अधीक्षक डा. एसबीएस नेताम ने कहा, रिएजेंटस की कमी होने की वजह से कुछ जांच प्रभावित हो रही है। जल्द ही जांच किट की आपूर्ति सामान्य हो जाएगी। इसके बाद परेशानी नहीं आएगी और उपचार प्रभावित नहीं होगा। व्यवस्था सुधारने के लिए प्रयास किया जा रहा है।

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