रायपुर

65 जगह चौबीसों घंटे कर्मचारी तैनात…सड़कों से तीन माह में सवा लाख से अधिक मवेशी हटाए गए

0 शासन ने हाई कोर्ट में दी जानकारी

बिलासपुर। छत्तीसगढ़ में सड़कों पर मवेशियों का डेरा होने और इनकी वजह से हो रहे सड़क हादसों को लेकर दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के दौरान राज्य शासन के विभागों ने इस समस्या के निराकरण के लिए बीते 3 महीनों के भीतर किए गए प्रयासों की जानकारी हाईकोर्ट में दी।

NHAI और राज्य सरकार के विभागों की ओर से बताया गया है कि बीते 3 महीने में 1 लाख 37 हजार 913 मवेशी हटाए गए। इनमें 45 हजार 687 मवेशी राष्ट्रीय राजमार्ग से हटाए गए। इन्हें कांजी हाउस, गौठान और गौशालाओं में शिफ्ट किया गया। वहीं 34 हजार 787 मवेशियों के गले में रेडियम का पट्टा बांधा गया।

मालिकों से वसूला जुर्माना – तीन शिफ्ट में लगाए कर्मचारी

हाई कोर्ट को जानकारी दी गई है कि बीते 3 महीनों में की गई कार्रवाई के दौरान 1887 मवेशियों के मालिकों से 7 लाख 77 हजार रुपया जुर्माना वसूल किया गया।

NHAI की ओर से बताया गया कि 65 स्थानों पर 24 घंटे सातों दिन तीन शिफ्ट में कर्मचारी तैनात किए गए हैं, जो मवेशियों को सड़कों से हटाने का काम कर रहे हैं। सड़कों पर टोल फ्री नंबर 1033 प्रदर्शित किए गए हैं, जिनसे मिली 76 शिकायतों का निराकरण किया गया है। राज्य राजमार्गों का विवरण देते हुए लोक निर्माण विभाग ने बताया कि उसने भी 35 स्थान चिन्हांकित किए हैं, जो अधिक संवेदनशील हैं। इनमें से मवेशियों को हटाने के लिए 135 कर्मचारी तैनात किए गए हैं। मवेशियों को रखने में दिक्कत के कारण नई गौशाला खोलने के लिए टेंडर जारी किए जा चुके हैं।

हाईकोर्ट के निर्देश पर बनी है कमेटी

बता दें कि आवारा मवेशियों के कारण हो रहे सड़क हादसों के चलते दायर जनहित याचिका पर पिछली सुनवाई में हाईकोर्ट ने मुख्य सचिव की अध्यक्षता में समिति बनाने, जिलों में कलेक्टर और नगरीय क्षेत्रों तथा ग्राम पंचायतों में भी समिति बनाने का निर्देश दिया था। मुख्य सचिव की अध्यक्षता में आठ अधिकारियों की एक हाई पावर कमेटी बनाई गई है। इसके अलावा जिलों, नगरी निकायों त था पंचायतों में भी समितियां काम कर रही हैं।

हाईकोर्ट ने कार्य में प्रगति की जानकारी के साथ नया शपथ पत्र देने का निर्देश संबंधित विभागों को दिया है। अब इस मामले पर अगली सुनवाई 19 सितंबर को होगी।

लाखों मवेशी हटाए, मगर हालात जस के तस

राज्य स्तरीय समिति ने हाई कोर्ट को बताया है कि प्रदेश भर से कुल 1 लाख 37 हजार 913 आवारा मवेशी सड़कों से हटाए गए। इस कार्रवाई के बाद कई प्रमुख मार्गों पर मवेशियों की मौजूदगी कम नजर आ रही है, मगर अनेक सड़कों पर अब भी रात के वक्त बड़ी संख्या में मवेशी नजर आ रहे हैं। सच कहें तो बिलासपुर जिले की सड़कों पर इस तरह का नजारा आम है। शहर के होकर सीपत-बलौदा-कोरबा की ओर जाने वाले मार्ग पर तो आज भी पहले की ही तरह नजारा दिखाई देता है। इस संवाददाता ने दो-तीन दिन पहले ही इस मार्ग से गुजरते हुए कई स्थानों पर सड़कों में रात के वक्त मवेशियों के झुण्ड को देखा। सुबह के वक्त लौटते समय भी मवेशी सड़कों के किनारे खड़े नजर आये।

सवाल यह उठता है कि जिस जिले में हाई कोर्ट स्थित है, वहां का नजारा इस तरह का है तो बाकी स्थानों के हालात की समीक्षा जरुरी हो जाती है। हाई कोर्ट की नाराजगी और तमाम दिशा-निर्देश के बावजूद अगर जिम्मेदार कर्मचारी-अधिकारी लापरवाही करते हैं तो शासन-प्रशासन को भी कड़ा रुख अपनाना पड़ेगा।

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