धर्म

करवा चौथ पूजा का शुभ मुहूर्त और चांद निकलने का समय यहां जानें

 करवा चौथ भारत का एक लोकप्रिय पर्व है। इस दिन शादीशुदा महिलाएं पति की लंबी आयु के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। तो वहीं कई जगह ये व्रत कुंवारी लड़कियों द्वारा भी अच्छे वर की प्राप्ति के लिए रखा जाता है। यह व्रत सूर्योदय से पहले सरगी के साथ शुरू हो जाता है और इसकी समाप्ति चांद निकलने के बाद होती है। इस व्रत में चंद्र दर्शन जरूरी माना जाता है। साल 2023 में करवा चौथ व्रत 1 नवंबर को पड़ रहा है।

Karva Chauth 2023 Puja Time (करवा चौथ पूजा समय 2023)
करवा चौथ पूजा मुहूर्त (1 नवंबर 2023) – 05:29 PM से 06:45 PM
करवा चौथ व्रत समय (1 नवंबर 2023) – 06:13 AM से 08:14 PM
करवा चौथ के दिन चन्द्रोदय (1 नवंबर 2023) – 08:14 PM
चतुर्थी तिथि प्रारम्भ – 31 अक्टूबर 2023 को 09:30 PM बजे
चतुर्थी तिथि समाप्त – 01 नवम्बर 2023 को 09:19 PM बजे

Karva Chauth Sargi: करवा चौथ में सरगी क्या है?
करवा चौथ का त्यौहार सरगी के साथ आरम्भ होता है। सरगी करवा चौथ के दिन सूर्योदय से पहले किये जाने वाले भोजन को कहते हैं। जो महिलाएं इस दिन व्रत रखती हैं उनकी सास उनके लिए सरगी बनाती हैं। वहीं जिनकी सास नहीं होती वो अपने पति से या खुद ही सरगी बनाती हैं। सरगी में सास द्वारा अपनी बहू को पहनने के लिए नए वस्त्र, श्रृंगार का समान और खाने-पीने की चीजें दी जाती हैं।

Karva Chauth Puja Vidhi (करवा चौथ व्रत की पूजा-विधि)
-सुबह सूर्योदय से पहले उठ जाएं और स्नान आदि करके पूजा घर की सफ़ाई कर लें।
-फिर सास द्वारा दिया हुआ भोजन करें और भगवान की पूजा करके अपना व्रत शुरू करें।
-इसके बाद शाम में फिर से स्नान करें और अच्छे से तैयार हो जाएं।
-इसके बाद एक मिट्टी की वेदी पर सभी देवताओं की स्थापना करें। जिसमें 10 से 13 करवे रखें।
-एक थाली में पूजन-सामग्री में धूप, दीप, चन्दन, रोली, सिन्दूर आदि चीजें रखें। दीपक में पर्याप्त मात्रा में घी रखें जिससे वह पूरे समय तक जलता रहे।
-फिर चन्द्रमा निकलने से लगभग एक घंटे पहले पूजा शुरू करनी चाहिए।
-शाम की पूजा के समय व्रत कथा भी जरूर सुनें।
-फिर रात में चंद्रमा को अर्घ्य देने की तैयारी करें।
-इस दिन चन्द्र दर्शन छलनी के द्वारा करना चाहिए। साथ ही दर्शन के समय अर्घ्य देते हुए चन्द्रमा की पूजा करनी चाहिए।
-चंद्रमा की पूजा के बाद उसे भोग लगाया जाता है।
-चन्द्र-दर्शन के बाद बहू अपनी सास को थाली में सजाकर नए वस्त्र, मिष्ठान, फल, मेवे, रूपये आदि देती है और उनका आशीर्वाद प्राप्त करती है।

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